बक्षीजी की गर्जना!

जवान का खून है
अस्सी में भी जूनून है ,
रणभूमि से कोसो दूर
हर साथी के शहादत से ,
वे आज भी लहू – लुहान है ..

तू क्या सिखाएगा इन्हे युद्ध ,
तू क्या सिखाएगा इन्हे युद्ध ,
उतनी तेरी औकात नहीं है !

Published by अखिलेश कुलकर्णी

मराठी व इंग्रजी साहित्याला जोपासणारा एक कोवळा लेखक व कवी .

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