दोस्त , दोस्त न रहा !

मी पुन्हा येईन, मी पुन्हा येईन,मैंने था कहा ,दिल ने चाहा था , सरकार बनाना .. बेवफा निकली तू ,सिर्फ खेल है सारा,कहके गयी थी ,साथ है निभाना ,घर के झगड़े को बाहर निकाला, तब मैंने जाना ,धोखा हो गया ! दी थी पुकार ,साथ मे सब पाना , कुर्सी के वास्ते ,मुझे न पहचानाContinue reading “दोस्त , दोस्त न रहा !”

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