तू ठहर जा… 💔

तू ठहर जा ,
कहा चला जा रहा है ?

बंद दरवाजो की परछाई में ,
बादलो का अंधकार है ,
फटती हुई धरती में,
तुफानो की तबाही है ,
दिल छोटा ना कर ,
खिलता आज भी कमल ,
और पारिवारिक परिवार है ,

साथ जियेंगे , जीने के लिए ,
जीना इसीका नाम है
तू ठहर जा ,
इतने जल्दी कहा चला जा रहा है ?

तू ठहर जा ,
कहा चला जा रहा है ?

दिल ने कुछ कहा ,
कर दिमाग अगर भारी ,
खुदकी ना सुन ,
बात सुन ले हमारी ,
कभी याद तो कर ,
पूछूंगा हालत तुम्हारी ,

यारो को बोल तू दिल की गल  ,
साथ पिएंगे , पीने के लिए ,
पीने में क्या गम है ,
तू ठहर जा ,
इतने जल्दी कहा चला जा रहा है ?

Published by अखिलेश कुलकर्णी

मराठी व इंग्रजी साहित्याला जोपासणारा एक कोवळा लेखक व कवी .

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