कोरोना की कहानी…

तू दुखी था घूमने न जा सका,
वह दुःख के साथ घूम रहा था
तू अपनों की याद मे परेशान था,
उसे तो उन्हें खिलाना भी था
तू पराया होके भी सरकार का लाडला था,
अपना तो आज भी पैदल ही चला था !

तू मोमोस न मिलने से खफा था,
उसे दो वक्त का खाना भी काफी था
तूने तो पोटली महीनो की भरी थी,
वह आज भी भूखा सो रहा था
तू ‘Middle Class Justice ‘ की बात करता था ,
कभी गिना राशन क़े बाबू ने कितना खाया था

तू ‘Work from home ‘ से थक गया,
वह तो आजभी बेरोजगार का प्रतिक बना जी रहा था
AC न चलना जो तेरा ‘struggle’ बन गया था
वह तो छाव क़े नीचे भी मुस्कुराता था
तू ज़िंदा रहके जिसे ‘Setback’ कहता था
वह तो रोज मरके भी ,
ज़िन्दगी जीना सीखा रहा था !!!

Published by अखिलेश कुलकर्णी

मराठी व इंग्रजी साहित्याला जोपासणारा एक कोवळा लेखक व कवी .

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