वक्त ने किया सितम…

वक्त ने किया सितम ,
मेरा क्या गुनाह है ,
जाकर तुम भी वक्त से पूछो ,
तू किस घडी में ,
बीतता चला जा रहा है ..

वक्त ने किया सितम,
ठहर जा कुछ मेरी भी सुन ,
सवालो के जवाब दे जा –
दो सालो में गुजारी यादो को
दो पल में क्यों मिटा रहा है ..

वक्त ने किया सितम,
रुक जाये ज़िन्दगी ,
ऐसे किस मोड़ पे चला जा रहा है ,
बड़े मुश्किल से ,
अरमानो को इकठ्ठा किया है ,
क्यों उन्हें सता रहा है ..

वक्त ने किया सितम,
जो पाना था , वह खोना पड़ा है ,
तक़दीर ऐसी लिख दी तूने ,
की अब मुस्कुराता हु
तेरा हसीन चेहरा देखके ,

अब तो बदल जा मेरे यार ,
ज़िन्दगी को आगे निभाना भी तो है !!!

Published by अखिलेश कुलकर्णी

मराठी व इंग्रजी साहित्याला जोपासणारा एक कोवळा लेखक व कवी .

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