शुक्रिया उसे भी…

शुक्रिया उसे भी ,
जिसने दिल से हमे चाहा  ,
चाहत के अरमान में घंटे बिताया ,
बिताया जो वक्त हमसे चुराया ,
चुराया था दिल ,
दिल का पेशा बनाया ..
शुक्रिया उसे भी ,
आपने दिल से हमे चाहा …

शुक्रिया उसे भी ,
जिसने ‘यार’ हमे कहा ,
कहे मीठे लब्ज़
लब्ज़ो में हमको फसाया ,
फ़साने वाला भी जब खुद ही फस गया ,
गया वह जुर्मी वक्त ,
वक्त ने सब कुछ भुलाया ..
शुक्रिया उसे भी ,
आपने ‘यार ‘ हमे कहा …

शुक्रिया उसे भी ,
जिसने याद न किया ,
किया इजहार जिससे हमने ,
हमने खुदको भुलाया ,
भुलाया जो आपने उन मीठी यादो को ,
यादो पर मुझे अब ऐतबार न रहा ,
रहा बस मै, और रहा फ़ैल – इ – हाल ..
शुक्रिया उसे भी ,
आपने याद न किया …

Published by अखिलेश कुलकर्णी

मराठी व इंग्रजी साहित्याला जोपासणारा एक कोवळा लेखक व कवी .

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